रविवार, 24 जुलाई 2011

लग्न : शुभ और अशुभ ग्रह

मेष लग्न व वृषभ लग्न

कुंडली देखते समय सबसे पहले लग्न पर ध्यान दिया जाता है। व्यक्ति के जन्म के समय आकाश में जो राशि उदित होती है, उसे ही उसके लग्न की संज्ञा दी जाती है। कुंडली के प्रथम भाव को लग्न कहते हैं।
प्रत्येक लग्न के लिए कुछ ग्रह शुभ होते हैं, कुछ अशुभ। लग्न भाव में जो अंक लिखा होता है,वही लग्न होता है।यदि लग्न भाव में 1 अंक लिखा है, तो व्यक्ति का लग्न मेष होगा।
शुभ ग्रह : लग्न का स्वामी शुभ होता है। अत: मंगल शुभ माना जाएगा। हालॉंकि अष्टमेश है मगर दोष होने से भी शुभ है। सूर्य पंचम भाव (त्रिकोण) का स्वामी होने से शुभ है। इसी तरह बृहस्पति भी नवम भाव (त्रिकोण) का स्वामी होने से अति शुभ है। हालॉंकि यह 12वें भाव का स्वामी भी है मगर वह नवम का ही फल देगा। ये तीनों ग्रह मेष लग्न के लिए कारक ग्रह कहलाएँगे और अपनी दशा-महादशा में जीवन में महत्वपूर्ण परिवर्तन लाएँगे। यदि कुंडली में ये ग्रह निर्बल हों तो पूजा, मंत्र जाप, रत्न, जड़ी आदि द्वारा इन्हें बलवान करना आवश्यक है।
अशुभ ग्रह : मेष लग्न के लिए बुध बेहद अशुभ है क्योंकि तीसरे और छठे भाव का स्वामी है। शु्क्र भी अपनी दशा में मारकेश बनता है क्योंकि द्वितीय और सप्तम का स्वामी है । शनि दशमेश होकर शुभभ, मगर आयेश होकर फिर पापी हो जाता है। ये तीनों ग्रह मेष लग्न के लिए अकारक हैं और अपनी दशा-महादशा में हानि पहुँचाते हैं। कुंडली में इनका निर्बल होना ही अच्छा है। इनकी शुभ भावों में स्थिति भाव के फलों का नाश करती है। इन ग्रहों के रत्न नहीं पहने जाते, इन्हें मंत्र, दान और पूजा-पाठ से शांत रखा जाता है।
तटस्थ ग्रह : चंद्रमा चतुर्थ का स्वामी होकर मेष लग्न के लिए तटस्थ हो जाता है। यह हानि-लाभ में विशेष योगदान नहीं देता।
मेष लग्न वालों के लिए मूँगा, माणिक व पुखराज शुभ है। मंगलवार, रविवार व बृहस्पतिवार शुभ दिन हैं। सफेद, पीला और लाल रंग शुभ हैं।
वृषभ लग्न
स्वभाव : वृषभ राशि व लग्न पर शुक्र का पूर्ण प्रभाव होने से इन व्यक्तियों में सौंदर्य व प्रेम की चाहत स्वाभाविक रूप से होती है। व्यक्तित्व आकषक होता है। विशेषत: यदि लग्न पर शुक्र की दृष्टि हो, शनि का प्रभाव न हो तो बाल प्रौढ़ावस्था तक काले रहते हैं, उम्र का प्रभाव नहीं दिखता। इनकी अभिभरूचि कलात्मक होती है। कला में विशेष रूचि, खाने-पीने का शौक होता है। घर से बाहर घूमने-फिरने, आराम करने की प्रवृत्ति, थोड़े से स्वार्थी भी होते हैं। इस राशि के व्यक्ति व्यसनाधीन जल्दी होते हैं जिससे स्वास्थ्य हानि हो सकती है।
शुभ ग्रह : शनि (भाग्येश व राज्येश), सूर्य (चतुर्थेश),बुध (पंचमेश)
अशुभ ग्रह : चंद्रमा (तृतीयेश), बृहस्पति (अष्टमेश व आयेश)
तटस्थ गृह : शुक्र (लग्नेश, षष्ठेश), मंगल (सप्तमेश, व्ययेश)
शुभ रत्न : नीलम, माणिक, पन्ना
(शनि आदि ग्रहों की शुभता हेतु)
शुभ रंग : हरा, नीला, काला
शुभवार : शनिवार, रविवार

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